1- अष्टमी और चतुर्दशी

कैसा पर्व है -- साधारण पर्व है !

क्या महत्व है -- संयम को दृढ करने के लिए हैं !

कैसे मनाएं -- उस दिन शक्ति अनुसार नियम संयम धारण करनी चाहिए और पाप क्रिआओं बचना चाहिए !

कब आता है -- एक माह मेँ दो अष्टमी और दो चतुर्दशी यह चार पर्व होते हैँ !


2- अष्टानिका पर्व

कैसा पर्व है -- शाश्वत पर्व है !

क्या महत्व है -- ये हमारा बहुत ही महत्वपूर्ण पर्व है !

चारों प्रकार के इंद्र सहित देवों के समूह नन्दीश्वर द्वीप में प्रति-वर्ष आषाढ़-कार्तिक और फाल्गुन मास में पूजा करने आते हैं !
नन्दीश्वर द्वीपस्थ जिनालयों की यात्रा में बहुत ही भक्तिभाव से युक्त
कल्पवासी देव - पूर्व दिशा में
भवनवासी देव - दक्षिण दिशा में
व्यंतर देव - पश्चिमी दिशा, और
ज्योतिष देव उत्तर दिशा में विराजमान जिन मंदिर जी में मुख से बहुत स्तोत्रों का उच्चारण करते हुए अपनी-अपनी विभूति अनुसार महिमा से पूजा करते हैं !

ये देव एकाग्रचित्त होकर अष्टमी से लेकर पूर्णिमा तक
पूर्वाह्न,
अपराह्न,
पूर्व रात्रि और
पश्चिम रात्रि में
2-2 पहर तक उत्तम भक्ति पूर्वक प्रदिक्षण क्रम से जिनेन्द्र प्रतिमाओं की विविध प्रकार से आठ दिनों तक अखंड रूप से पूजा-अर्चना करते हैं !

कैसे मनाएं -- क्यूंकि मनुष्य अढ़ाई-द्वीप के बाहर आगे नंदीश्वर द्वीप तक नहीं जा सकते इसलिए हम अपने-अपने मंदिरों में ही नंदीश्वर द्वीप की रचना करके पूजा करते हैं !

कब आता है --
अष्टानिका पर्व साल में तीन बार
कार्तिक,
फाल्गुन और
आषाढ़ के महीनो के अंतिम आठ दिनों में (अष्ठमी से पूर्णिमा तक) मनाया जाता है

नोट :- नन्दीश्वर-द्वीप के रचना/वहां के जिनालयों की/जिन-प्रतिमाओं की जानकारी के लिए नन्दीश्वर-द्वीप पर जाकर पढ़ सकते हैं !!!


3- दसलक्षण पर्व

कैसा पर्व है -- शाश्वत पर्व है !

क्या महत्व है -- ये हमारा बहुत ही महत्वपूर्ण पर्व है !
यह वर्ष मेँ तीन बार आते हैँ
किंतु भाद्र पद शुक्ल की पंचमी से अनंत चतुर्दशी तक होने वाले 10 लक्षण पर्व का विशेष महत्व है । क्योंकि श्रावण कृष्णा प्रतिपदा को उत्सर्पिणी काल का आरंभ होता है और शुरु के 49 दिन तक जल दूध इत्यादि की वर्षा होती है वह दिन भाद्र पद शुक्ल पंचमी का दिन होता है ।
इसी कारण स्थिति को 10 लक्षण पर्व का प्रारंभ होता है । 10 लक्षण धर्म के दस दिनों मेँ प्रत्येक दिन धर्म एक-एक लक्षण बतलाता है ।

कैसे मनाएं -- 10 दिन तक प्रति पूजा की जाती है रात्रि मेँ एक धर्म के विषय मेँ विद्वानोँ द्वारा व्याख्यान दिया जाता है और दस तक प्रत्येक दिन तत्वार्थ सूत्र जी के एक एक अध्याय का वाचन किया जाता है ।

कब आता है --
यह वर्ष मेँ तीन बार भाद्र पद माघ और चेत्र महीनो मेँ पंचमी से चौदस तक के 10 दिन मेँ आते हैँ ।


4- वीर शासन जयंती पर्व

कैसा पर्व है -- नैमित्तिक पर्व है !

क्या महत्व है -- भगवान महावीर स्वामी को केवल ज्ञान होने के 66 दिन बाद उनकी प्रथम धर्म देशना श्रावण कृष्ण एकम को खीरी थी इसलिए इस तिथि को वीर शासन जयंती के रुप मेँ मनाया जाता है !


कैसे मनाएं -- मंदिर जी में प्रातः देव-शास्त्र-गुरु, सरस्वती पूजन करें, उसके बाद संयम को धारण करते हुए पाप क्रियाओं से बचें ! कम से कम आज के दिन तो स्वाध्याय ज़रूर ही करें ! कुछ न बने तो जिनवाणी खोलकर मेरी भावना, बारह भावना ही पढ़लें !

कब आता है --
श्रावण कृष्ण एकम मनाया जाता है !

बाकी विषयों के लिए पढ़ते रहिये "जैनसार, जैन धर्म का सार ... "

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